सुरक्षा चिंताओं के बीच भारत में स्टारलिंक की अंतिम मंज़ूरी रोकी गई: रिपोर्ट
स्टारलिंक को जून 2025 में भारत में उपग्रह संचार सेवा देने का प्रमुख दूरसंचार लाइसेंस मिल गया था।
सुरक्षा चिंताओं के बीच भारत में स्टारलिंक की अंतिम मंज़ूरी रोकी गई: रिपोर्ट
चित्र में स्पेसएक्स का लोगो दिखाया गया है।

भारत ने सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की उपग्रह इंटरनेट सेवा स्टारलिंक को व्यावसायिक परिचालन शुरू करने के लिए आवश्यक अंतिम मंज़ूरियां फिलहाल रोक दी हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन सुरक्षा एजेंसियों ने स्टारलिंक की अंतिम सुरक्षा स्वीकृति रोक रखी है। चिंता ईरान में लाइसेंस न होने के बावजूद पश्चिम एशिया युद्ध के दौरान स्टारलिंक टर्मिनलों के कथित इस्तेमाल से जुड़ी है।

इस घटनाक्रम के बाद नई दिल्ली में यह सवाल उठा है कि भू-राजनीतिक तनाव की स्थिति में अमेरिकी स्वामित्व वाली वैश्विक कंपनी को भारतीय सुरक्षा नियमों का पालन करने के लिए किस हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा। स्टारलिंक से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि अलग-अलग सरकारों के विरोधाभासी निर्देश आने की स्थिति में वह भारतीय आवश्यकताओं का अनुपालन कैसे सुनिश्चित करेगी।

स्टारलिंक को जून 2025 में भारत में उपग्रह संचार सेवा देने का प्रमुख दूरसंचार लाइसेंस मिल गया था। हालांकि, व्यावसायिक सेवा शुरू करने से पहले उसे सुरक्षा परीक्षण, स्पेक्ट्रम आवंटन, जमीनी बुनियादी ढांचे और अन्य नियामकीय प्रक्रियाएं पूरी करनी थीं।

रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा संबंधी चिंताओं से उपग्रह स्पेक्ट्रम के मूल्य निर्धारण को मंज़ूरी देने की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है। दूरसंचार विभाग ने रूपरेखा तैयार कर ली है, लेकिन इसे अभी केंद्रीय मंत्रिमंडल के पास अंतिम मंज़ूरी के लिए नहीं भेजा गया है। इसका असर स्टारलिंक के साथ भारतीय प्रतिस्पर्धी कंपनियों की सेवाओं पर भी पड़ सकता है।

भारती एयरटेल और रिलायंस जियो ने 2025 में भारत में स्टारलिंक उपकरण और सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए स्पेसएक्स के साथ समझौते किए थे। लेकिन इन साझेदारियों का क्रियान्वयन भी आवश्यक सरकारी मंज़ूरियों पर निर्भर है।

स्टारलिंक पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद उपग्रहों के नेटवर्क के जरिए दूरदराज़ और पारंपरिक इंटरनेट सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों में तेज़ इंटरनेट उपलब्ध कराती है। भारत में इसकी प्रस्तावित शुरुआत को ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में संपर्क बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा था, लेकिन ताज़ा घटनाक्रम से इसका इंतज़ार और लंबा हो सकता है।

स्रोत:AA
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