भारत के डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग ने जहाज मालिकों, शिप मैनेजरों और सर्टिफिकेशन कंपनियों को निर्देश दिया है कि अगले आदेश तक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की तैनाती न की जाए।
यह निर्देश क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे हमलों और बढ़ते सुरक्षा तनाव के बीच जारी किया गया है।
डायरेक्टरेट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि एहतियाती उपायों के तहत “होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली यात्राओं में शामिल जहाजों पर भारतीय नाविकों की तैनाती अगले आदेश तक नहीं की जानी चाहिए।”
इसके साथ ही फारस की खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के जलक्षेत्रों में सुरक्षा सतर्कता बढ़ाने को भी कहा गया है।
निर्देश में नौवहन चेतावनियों और सुरक्षा सलाहों की लगातार निगरानी करने तथा ISPS कोड यानी इंटरनेशनल शिप एंड पोर्ट फैसिलिटी सिक्योरिटी कोड को सख्ती से लागू करने की बात कही गई है।
डायरेक्टरेट ने आपात स्थिति में तत्काल रिपोर्टिंग और सहायता सुनिश्चित करने को भी कहा है।
भारत का यह निर्देश अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ते तनाव के बीच आया है। दोनों पक्षों के बीच हमलों का आदान-प्रदान जारी है, जबकि पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुए समझौता ज्ञापन का उद्देश्य संघर्ष को समाप्त करना और स्थायी शांति समझौते की दिशा में आगे बढ़ना था।
इस सप्ताह ओमानी जलक्षेत्र में होर्मुज जलडमरूमध्य की दक्षिणी शिपिंग लेन से गुजर रहे संयुक्त अरब अमीरात के दो टैंकरों पर ईरानी हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई थी।
रिपोर्टों के अनुसार, 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से मध्य पूर्व में 16 भारतीय नागरिक मारे गए हैं या लापता बताए गए हैं।















