केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों यानी CAPF के 3,000 से अधिक ग्रुप-A कैडर अधिकारियों ने CAPF (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। याचिका दायर करने वालों में वीरता पुरस्कार प्राप्त अधिकारी और महिला अधिकारी भी शामिल हैं।
यह कानून 2 अप्रैल को संसद से पारित हुआ था और 9 अप्रैल को अधिसूचित किया गया। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नया कानून CAPF कैडर अधिकारियों के लिए नेतृत्व पदों तक पदोन्नति का रास्ता और कठिन बना देता है।
रिपोर्ट के अनुसार, कानून से CAPF के वरिष्ठ पदों पर भारतीय पुलिस सेवा यानी IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति के लिए रास्ता और खुल सकता है। इससे बलों के भीतर सेवा दे रहे कैडर अधिकारियों में असंतोष बढ़ा है।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि यह कानून मई 2025 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को प्रभावी रूप से निष्प्रभावी करने के लिए लाया गया है। उस फैसले में अदालत ने CAPF नेतृत्व में IPS अधिकारियों की संख्या कम करने और CAPF अधिकारियों को शीर्ष पदों तक पहुंचने का अवसर आसान बनाने का निर्देश दिया था।
CAPF में CRPF, BSF, CISF, ITBP, SSB और अन्य केंद्रीय बल शामिल हैं, जो आंतरिक सुरक्षा, सीमा सुरक्षा, औद्योगिक सुरक्षा और संवेदनशील अभियानों में अहम भूमिका निभाते हैं।
अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों में सेवा देने के बावजूद अगर शीर्ष नेतृत्व पदों पर बाहरी कैडर के अधिकारियों को प्राथमिकता दी जाती है, तो इससे बलों के मनोबल और करियर प्रगति पर असर पड़ता है।






















