मध्य पूर्व में युद्ध के कारण विमान ईंधन की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी के बीच भारत सरकार ने एयरलाइनों को राहत देने के लिए 1 अरब डॉलर का सहायता पैकेज मंज़ूर किया है।
सरकार ने बुधवार को कहा कि यह एकमुश्त सहायता सरकारी तेल विपणन कंपनियों को ब्याज-मुक्त अग्रिम के रूप में दी जाएगी, ताकि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें संचालित करने वाली एयरलाइनों के लिए विमान ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिल सके।
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष से तेल-समृद्ध क्षेत्र में आपूर्ति प्रभावित हुई है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य में रुकावट के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है। आम तौर पर दुनिया के करीब पांचवें हिस्से का तेल इसी मार्ग से गुजरता है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, विमान ईंधन की कीमतें मार्च के बाद से दोगुनी से अधिक हो चुकी हैं। मार्च में विमान ईंधन 60.50 रुपये प्रति लीटर था, जो मई में बढ़कर 142 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया।
विमान ईंधन एयरलाइनों की परिचालन लागत का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा होता है। ऐसे में ईंधन कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी से एयरलाइनों के मुनाफे पर दबाव बढ़ा है और हवाई किराए में भी वृद्धि देखी जा रही है।
सरकार ने बयान में कहा कि यह कदम घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई संपर्क को बनाए रखने में मदद करेगा और हवाई सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करेगा।
तेल मंत्री हरदीप पुरी ने कहा कि यह कोष विमानन क्षेत्र से जुड़े 77 लाख रोजगारों की रक्षा करेगा। उन्होंने कहा कि एयरलाइन संचालन को व्यवहार्य बनाए रखकर हवाई अड्डा ढांचे में किए गए बड़े सार्वजनिक निवेश को भी सुरक्षित रखा जा सकेगा।















