तुर्किए के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि मिस्र भी मक्का संयुक्त रक्षा समझौते में शामिल होगा। यह समझौता तुर्किए , सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है। सऊदी अरब, तुर्किए और पाकिस्तान ने शुक्रवार को मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
तुर्किए के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने सरकारी समाचार एजेंसी अनादोलू से कहा कि मिस्र इस समझौते का “स्वाभाविक साझेदार” है।
फिदान ने कहा, “मुझे विश्वास है कि अगले चरण में मिस्र भी इस गठबंधन में हमारे साथ होगा। हम पहले से ही एक-दूसरे के साथ ऐसे व्यवहार करते हैं जैसे हम गठबंधन के सदस्य हों।”
उन्होंने कहा कि कुछ तकनीकी मुद्दे बाकी हैं और उनके समाधान के बाद मिस्र के इस समझौते का हिस्सा न बनने का कोई कारण नहीं रहेगा।
फिदान ने यह भी स्पष्ट किया कि यह समझौता किसी विशेष देश को निशाना बनाकर नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, “ऐसा कोई साझा खतरा नहीं है जिसे हमने लिखित रूप में रखा हो।”
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा था कि इस समझौते के तहत किसी भी सदस्य देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा। मंत्रालय के अनुसार, समझौते का उद्देश्य सामूहिक प्रतिरोध क्षमता को मजबूत करना है।
फिदान ने इंटरव्यू में कहा कि यह समझौता क्षेत्र में स्थायी स्थिरता लाने की दिशा में “सबसे महत्वपूर्ण कदम” है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि गठबंधन भविष्य में और विस्तृत हो सकता है।
उन्होंने कहा, “हमारे राष्ट्रपति की दृष्टि के तहत हमें तीन देशों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। हमें बढ़ना चाहिए और जरूरत पड़ने पर सभी देशों को इस छतरी के नीचे लाना चाहिए।”






















