भारत और दक्षिण कोरिया ने रक्षा, जहाज निर्माण, तकनीक और स्वच्छ ऊर्जा सहित कई क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई है। दोनों देशों ने मध्य पूर्व में तनाव के वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़ रहे प्रभाव पर भी चर्चा की।
दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सियोल में हुई बैठक के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के तरीकों पर बातचीत की।
दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों मंत्रियों ने अप्रैल में दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई शिखर बैठक के बाद शुरू की गई द्विपक्षीय पहलों को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।
बैठक के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि बातचीत में राजनीति, व्यापार, निवेश, रक्षा, तकनीक, जहाज निर्माण, स्वच्छ ऊर्जा, संस्कृति और लोगों के बीच आदान-प्रदान जैसे मुद्दे शामिल रहे।
दोनों मंत्रियों ने स्टार्टअप्स, वित्तीय तकनीक और बहुपक्षीय मंचों में सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की। इसके साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर विचार साझा किए गए।
भारत और दक्षिण कोरिया ने मध्य पूर्व में जारी तनाव के वैश्विक व्यापार पर प्रभाव को लेकर चिंता जताई। दोनों पक्षों ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को तेजी से और सुरक्षित रूप से फिर से खोलना तथा सभी जहाजों की सुरक्षित आवाजाही वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्री चो ह्यून ने आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में द्विपक्षीय परियोजनाओं की प्रगति का स्वागत किया।
वहीं जयशंकर ने कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए सहमत पहलों को ईमानदारी से लागू करना जरूरी है।
चो ह्यून ने कोरियाई प्रायद्वीप में शांति को बढ़ावा देने के लिए सियोल की कोशिशों की जानकारी भी जयशंकर को दी। उन्होंने उत्तर कोरिया के साथ भारत के कूटनीतिक संपर्कों का उल्लेख करते हुए इस दिशा में नई दिल्ली की रचनात्मक भूमिका की उम्मीद जताई।




















