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UAE को ब्रह्मोस और आकाशतीर बेचने पर भारत की बातचीत
ब्रह्मोस भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की गई सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है।
UAE को ब्रह्मोस और आकाशतीर बेचने पर भारत की बातचीत
सिंगापुर एयरशो में ब्रह्मोस बूथ का एक दृश्य

भारत सरकार संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE के साथ अपने प्रमुख रक्षा सिस्टम बेचने को लेकर बातचीत कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस और एयर डिफेंस सिस्टम आकाशतीर शामिल हैं।

चार भारतीय सूत्रों के हवाले से रॉयटर्स ने बताया कि UAE मध्य पूर्व में युद्ध के बाद अपनी रक्षा खरीद बढ़ा रहा है और भारत से कई हथियार प्रणालियों में रुचि दिखा रहा है।

मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने कहा, ‘‘UAE ने हमारे कई हथियार सिस्टमों में रुचि दिखाई है, जिनमें ब्रह्मोस और आकाशतीर शामिल हैं। भारत और UAE के बीच बातचीत शुरुआती चरण में है और तेजी से आगे बढ़ रही है।’’

भारतीय अधिकारियों और UAE के विदेश मंत्रालय की ओर से इस मामले पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई।

ब्रह्मोस भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की गई सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। इसे दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइलों में गिना जाता है और इसे जमीन, समुद्र तथा हवा से लॉन्च किया जा सकता है।

वहीं आकाशतीर भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और भारतीय सेना द्वारा विकसित एक पूरी तरह ऑटोमेटेड एयर डिफेंस सिस्टम है। इसका उद्देश्य हवाई खतरों की पहचान, निगरानी और जवाबी कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाना है।

रिपोर्ट के अनुसार, UAE भारत और अन्य देशों से रक्षा उपकरण खरीदने पर विचार कर रहा है, क्योंकि हालिया युद्ध के दौरान खाड़ी देश को ईरान की ओर से बड़े हमलों का सामना करना पड़ा था। इसके अलावा UAE होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को भी मजबूत करना चाहता है, जो उसके ऊर्जा निर्यात के लिए बेहद अहम मार्ग है।

इस साल की शुरुआत में UAE ने दक्षिण कोरिया के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे, जिसकी संभावित कीमत 35 अरब डॉलर से अधिक बताई गई थी।

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी SIPRI के आंकड़ों के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच मध्य पूर्व को हथियार निर्यात करने वाला सबसे बड़ा देश अमेरिका था, जिसकी हिस्सेदारी 54 प्रतिशत रही। इसके बाद इटली 12 प्रतिशत और फ्रांस 11 प्रतिशत के साथ प्रमुख आपूर्तिकर्ता रहे।

हालांकि UAE को ब्रह्मोस बेचने से पहले भारत को रूस की मंजूरी की जरूरत होगी, क्योंकि यह मिसाइल भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की गई है। सूत्रों का कहना है कि मॉस्को और अबू धाबी के करीबी संबंधों को देखते हुए यह मंजूरी बड़ी बाधा नहीं बननी चाहिए।

SIPRI के वरिष्ठ शोधकर्ता सिमोन वेजमैन के अनुसार, ब्रह्मोस मिसाइल और आकाशतीर सिस्टम दोनों UAE की सुरक्षा जरूरतों के अनुरूप हो सकते हैं, हालांकि खाड़ी देशों को हथियार बेचने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है।

स्रोत:reuters
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