दुनिया
2 मिनट पढ़ने के लिए
नाजिया इलाही खान की इस्लाम विरोधी टिप्पणियों पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार
न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा कि मामला “बहुत गंभीर” है, लेकिन पहले पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई जानी चाहिए।
नाजिया इलाही खान की इस्लाम विरोधी टिप्पणियों पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार
नई दिल्ली में भारत के सुप्रीम कोर्ट के सामने एक वकील अपने मोबाइल फ़ोन को देख रहा है। Reuters

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा नेता नाजिया इलाही खान द्वारा पैगंबर मोहम्मद पर कथित आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणी के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया।

न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा कि मामला “बहुत गंभीर” है, लेकिन पहले पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई जानी चाहिए।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अमानुल्लाह ने पूछा, “आप जनहित याचिका दाखिल कर रहे हैं? यहां क्यों आए हैं? क्या आपने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है?” उन्होंने कहा कि व्यवस्था पर भरोसा रखना चाहिए।

मामला एक पॉडकास्ट के दौरान दिए गए कथित बयान से जुड़ा है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मुंबई और ठाणे में दर्ज शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि खान की टिप्पणी से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।

शिकायतकर्ताओं ने उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। पुलिस ने धार्मिक भावनाएं भड़काने से संबंधित धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामले दर्ज भी किए थे। पुलिस जांच को पश्चिम बंगाल ट्रांसफर करने पर विचार कर रही थी, क्योंकि नाजिया इलाही खान वहीं रहती हैं।

याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि खान की कथित टिप्पणी देशभर में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ सकती है। हालांकि पीठ ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया को दरकिनार कर सीधे सुप्रीम कोर्ट आने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।

न्यायमूर्ति अमानुल्लाह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट सर्वोच्च स्तर पर निगरानी करने वाली संस्था है, लेकिन वह अन्य प्राधिकरणों का विकल्प नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि यह भी देखा जाना चाहिए कि निचले स्तर की संस्थाएं काम कर रही हैं या नहीं।

उन्होंने कहा कि अगर हर मामला सीधे शीर्ष अदालत में लाया जाएगा, तो अन्य संस्थाओं की भूमिका कमजोर पड़ जाएगी।

पीठ ने वकीलों से ऐसे मामलों को सनसनीखेज न बनाने की भी अपील की। न्यायमूर्ति अमानुल्लाह ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति ने गलती की है, तो उसे कानून की पूरी ताकत से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

इस से पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने मुसलमानों के सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि हिंदुओं को सतर्क रहना चाहिए और मुसलमानों का सरकारी तथा निजी क्षेत्रों में बहिष्कार करना चाहिए।

स्रोत:TRT Hindi
खोजें
‘BJP में शामिल हो जाओ, नहीं तो माता-पिता मुसीबत में पड़ेंगे’: 
अभिजीत डिपके की मां
‘आप भारत का अतीत हैं, भविष्य से सावधान रहें’: मोदी-शाह पर राहुल गांधी
स्वदेशी ड्रोन तकनीक को तेजी से विकसित और सेना में शामिल करने की जरूरत: वायुसेना प्रमुख
दक्षिण एशिया की अर्थव्यवस्था को 2050 तक करीब 7% नुकसान पहुंचा सकती है अत्यधिक गर्मी: विश्व बैंक
मध्य पूर्व  संघर्ष में 16 भारतीयों की मौत, 75 घायल: विदेश मंत्रालय
मोदी की फेसबुक पोस्ट पर रोक के बाद भारत ने मेटा अधिकारियों को तलब किया
पेपर लीक पर सख्त सजा वाला बिल लोकसभा से पास
असम में बाढ़ से मौतों का आंकड़ा 78 पहुंचा, 11 लाख से अधिक लोग प्रभावित
एयर इंडिया बोइंग 787 के फ्यूल कंट्रोल स्विच में कोई ‘असामान्यता’ नहीं मिली: सरकार
उरी सेक्टर में लैंडमाइन विस्फोट में सेना के दो जवान घायल
पेपर लीक पर सख्त कानून की तैयारी, 10 साल तक जेल और 10 लाख डॉलर से ज्यादा जुर्माने का प्रस्ताव
पाकिस्तान में मानसूनी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से 110 की मौत
सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शन में नाबालिग छात्रों को रिहा करने का आदेश दिया
भारत सीमा के पास दो अड्डों पर चीन ने तैनात किए J-20 स्टेल्थ फाइटर: भारतीय मीडिया
2025 झड़पों में पाकिस्तानी J-10CE ने KLJ-7A रडार से भारतीय विमानों को निशाना बनाया: चीनी वैज्ञानिक