तुर्किए स्थित वकीलों के संगठन वर्ल्डवाइड लॉयर्स एसोसिएशन ने जम्मू-कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों और जनसांख्यिकीय बदलावों को लेकर 95 पन्नों की रिपोर्ट जारी की है। संगठन ने भारत सरकार पर कश्मीर में योजनाबद्ध तरीके से लोगों को उनकी जमीन और अधिकारों से वंचित करने तथा बसाहट संबंधी नीतियों के जरिए क्षेत्र की जनसांख्यिकीय संरचना बदलने का आरोप लगाया है।
इस्तांबुल में सोमवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठन ने 'द लॉन्गेस्ट सीज: सेटलर कोलोनियलिज्म एंड स्ट्रक्चरल वायलेंस इन जम्मू कश्मीर अंडर इंडियन ऑक्यूपेशन' शीर्षक से रिपोर्ट सार्वजनिक की।
रिपोर्ट 27 अक्टूबर 1947 की 79वीं वर्षगांठ से पहले जारी की गई। पाकिस्तान और कई कश्मीरी संगठन इस दिन को 'काला दिवस' के रूप में मनाते हैं।
संगठन ने घोषणा की कि वह कश्मीर में कथित यातना, गैरकानूनी हत्याओं, संपत्तियों के विनाश और जबरन विस्थापन से जुड़े मामलों को विदेशी अदालतों में सार्वभौमिक न्यायाधिकार के सिद्धांत के तहत उठाने का प्रयास करेगा।
WOLAS के अध्यक्ष और अधिवक्ता एनेस काफादार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कश्मीर को केवल भारत की आंतरिक सुरक्षा या सीमा विवाद के रूप में नहीं देखा जा सकता।
उन्होंने आरोप लगाया कि नई दिल्ली कश्मीर में योजनाबद्ध तरीके से आत्मसातीकरण, भूमि से बेदखली और बसाहट आधारित उपनिवेशवाद की नीतियां लागू कर रही है।
काफादार ने बताया कि WOLAS विभिन्न देशों की अदालतों में सार्वभौमिक न्यायाधिकार के सिद्धांत के तहत कानूनी कार्यवाही शुरू करने की तैयारी कर रहा है।
इस सिद्धांत के अंतर्गत कुछ गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों पर संबंधित देश के बाहर भी कानूनी कार्रवाई संभव हो सकती है, हालांकि इसकी शर्तें संबंधित देश के कानून पर निर्भर करती हैं।
काफादार ने कहा, “यह रिपोर्ट वास्तव में अंतिम परिणाम नहीं, बल्कि एक कानूनी अभियान की शुरुआत है।”
उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
WOLAS ने दावा किया कि वह भारतीय सैन्य और नागरिक अधिकारियों के खिलाफ यातना, विस्फोटकों से संपत्तियों को ध्वस्त करने, मनमानी हत्याओं और जनसांख्यिकीय विस्थापन से संबंधित मामलों में कानूनी कार्रवाई की दिशा में काम करेगा।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में किसी विदेशी अदालत द्वारा इन आरोपों पर मुकदमा स्वीकार किए जाने या किसी भारतीय अधिकारी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी होने की पुष्टि नहीं की गई है।
काफादार ने कश्मीर और फिलिस्तीन की परिस्थितियों की तुलना करते हुए आरोप लगाया कि इजरायल द्वारा कब्जे वाले वेस्ट बैंक और गाजा में इस्तेमाल की जाने वाली दमनकारी तकनीकों तथा सुरक्षा पद्धतियों का इस्तेमाल कश्मीर में भी किया जा रहा है।
साथ ही बोर्ड सदस्य डॉ. हसन बसरी बुलबुल ने 2019 के बाद की उन जनसांख्यिकीय इंजीनियरिंग प्रथाओं को प्रस्तुत किया जो चौथे जिनेवा कन्वेंशन का उल्लंघन करती हैं। इसके अलावा, उन्होंने 900,000 से अधिक सैन्य उपस्थिति, 36 साल तक कानूनी कार्रवाई से बचाव, 26,129 लोगों की मनमानी हिरासत, 4,249 किताबों की ज़ब्ती, और 7 ऐसे ठोस अंतरराष्ट्रीय कानूनी तंत्रों का भी उल्लेख किया, जिनके लिए भारत की मंज़ूरी की आवश्यकता नहीं है।




















