भारत और पाकिस्तान ने बुधवार को एक-दूसरे की हिरासत में बंद कैदियों की सूचियां कूटनीतिक माध्यमों से साझा कीं। यह आदान-प्रदान ऐसे समय हुआ है जब दोनों देशों के बीच लंबे समय से लंबित मुद्दों को बातचीत के जरिए हल करने की मांगें फिर तेज हो रही हैं।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस्लामाबाद ने पाकिस्तान में बंद 250 भारतीय नागरिकों की सूची भारतीय उच्चायोग को सौंपी। इनमें 52 नागरिक कैदी और 198 मछुआरे शामिल हैं।
इसी समय भारत ने भारतीय जेलों में बंद 439 पाकिस्तानी या “पाकिस्तानी माने जाने वाले” कैदियों की सूची साझा की। इनमें 386 नागरिक कैदी और 53 मछुआरे शामिल हैं।
भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2008 में हुए द्विपक्षीय समझौते के तहत दोनों देश हर साल 1 जनवरी और 1 जुलाई को कैदियों की सूचियां साझा करते हैं।
पाकिस्तान ने भारत से 97 पाकिस्तानी कैदियों की रिहाई और स्वदेश वापसी की भी मांग की है। पाकिस्तान के अनुसार, इनमें 64 नागरिक और 33 मछुआरे शामिल हैं, जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है और जिनकी राष्ट्रीयता की पुष्टि हो चुकी है।
यह आदान-प्रदान पाकिस्तान की ओर से बातचीत बहाल करने की नई अपीलों के कुछ दिनों बाद हुआ है। इस्लामाबाद ने सिंधु जल संधि सहित सभी लंबित मुद्दों को संवाद और कूटनीति के जरिए हल करने पर जोर दिया है।
मंगलवार को इस्लामाबाद में सिंधु जल संधि पर आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने भारत से “अच्छे पड़ोसियों” की तरह रहने और सभी विवादों को बातचीत से सुलझाने की अपील की।
डार ने नई दिल्ली से यह भी कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप सिंधु जल संधि के क्रियान्वयन को तुरंत बहाल करे। भारत की ओर से पाकिस्तान की इस अपील पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

















