मध्य पूर्व में जारी ऊर्जा संकट का असर भारत की तेल कंपनियों पर भी पड़ रहा है। भारत के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को कहा कि वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उछाल के कारण भारतीय तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
नई दिल्ली में एक उद्योग कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पुरी ने कहा कि देश में ईंधन आपूर्ति प्रबंधन स्थिर है, लेकिन तेल कंपनियां इस दबाव को कितने समय तक झेल पाएंगी, यह चिंता का विषय है।
पुरी ने कहा, “तेल कंपनियां इसे कब तक सह पाएंगी? सच कहूं तो यही बात मुझे चिंतित करती है।”
भारत सरकार का कहना है कि वैश्विक बाजार में भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद देश में पेट्रोलियम कीमतों को स्थिर रखा गया है। सरकार के मुताबिक, संघर्ष शुरू होने के 70 दिनों से अधिक समय बाद भी भारत उन कुछ देशों में शामिल है जहां पेट्रोलियम कीमतों को काबू में रखा गया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत की तेल विपणन कंपनियां रोज़ाना करीब 10 अरब रुपये यानी लगभग 10.45 करोड़ डॉलर का नुकसान उठा रही हैं, ताकि वैश्विक स्तर पर बढ़ी कीमतों का बोझ आम नागरिकों पर न पड़े।
पुरी ने कहा कि हाल के समय तक तेल कंपनियों ने अच्छा मुनाफा कमाया था, लेकिन मौजूदा रफ्तार से एक तिमाही का नुकसान पिछले साल के पूरे कर-बाद मुनाफे को खत्म कर सकता है।
उन्होंने कहा, “किसी चरण पर सरकार को इस पर फैसला लेना होगा।”
पुरी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब मध्य पूर्व में तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर दबाव बना हुआ है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, देश के पास 60 दिनों का कच्चा तेल, 60 दिनों की प्राकृतिक गैस और 45 दिनों का LPG रोलिंग स्टॉक मौजूद है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा मध्य पूर्व से हासिल करता है। 2024 में इस आपूर्ति का मूल्य करीब 180 अरब डॉलर था। भारत ने पिछले महीने यह भी घोषणा की थी कि उसने सात साल में पहली बार ईरान से तेल खरीद फिर शुरू की है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को लोगों से ईंधन की खपत कम करने की अपील की थी। उन्होंने वर्क फ्रॉम होम जैसे उपायों को अपनाने की बात कही थी।












