रॉयल नीदरलैंड्स नौसेना का एयर-डिफेंस और कमांड फ्रिगेट डी रूयटर सोमवार को कोची बंदरगाह पहुंचा। यह यात्रा “पैसिफिक आर्चर” मिशन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समान सोच वाले देशों के साथ कूटनीतिक और सुरक्षा संबंधों को मजबूत करना है।
जहाज के कोच्चि पहुंचने पर भारतीय नौसेना के फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट ने उसका एस्कॉर्ट किया और नौसेना बैंड के साथ औपचारिक स्वागत किया गया। 160 दिनों की इस यात्रा में कोच्चि पहला पड़ाव है। शहर का ऐतिहासिक डच संबंध होने के कारण इस यात्रा को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
फ्रिगेट आगे इंडोनेशिया, फिलीपींस, वियतनाम, दक्षिण कोरिया, टोक्यो, हवाई और कैरेबियन में नीदरलैंड्स के क्षेत्र एंटिल्स सहित कुल सात स्थानों का दौरा करेगा, जिसके बाद वह वापस अपने देश लौटेगा। यह पोत 12 अप्रैल को नीदरलैंड्स के डेन हेल्डर से रवाना हुआ था।
यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब आसपास के समुद्री क्षेत्रों में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी संघर्ष को हालिया तनावों में प्रमुख माना जा रहा है। हालांकि जहाज के अधिकारियों के अनुसार अब तक यात्रा सुचारु रही है और किसी भी परिस्थिति से निपटने की तैयारी की गई है।
युद्धपोत की कोच्चि यात्रा के साथ ही रॉयल नीदरलैंड्स नौसेना के उप-कमांडर मेजर जनरल रोब दे वित्त और भारत में नीदरलैंड्स की राजदूत मारिस गेरार्ड के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी दक्षिणी नौसेना कमान पहुंचा।
प्रतिनिधिमंडल ने दक्षिणी नौसेना कमान के चीफ ऑफ स्टाफ रियर एडमिरल प्रकाश गोपालन से मुलाकात कर समुद्री क्षेत्र से जुड़े पारस्परिक हितों के मुद्दों पर चर्चा की।



















