पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मंगलवार को शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ शिखर सम्मेलन में इंडस वाटर्स ट्रीटी और जल सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि पानी को कभी भी “हथियार” नहीं बनाया जाना चाहिए और न ही इसे दबाव या राजनीतिक लाभ के साधन के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में एससीओ के राष्ट्राध्यक्षों की परिषद को संबोधित करते हुए शरीफ ने कहा कि साझा जल संसाधनों से जुड़ी संधियां गंभीर और बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं हैं।
उन्होंने भारत का नाम लिए बिना कहा, “पानी हमारे क्षेत्र का जीवन और रक्त है। यह लाखों लोगों की जिंदगी को बनाए रखता है, हमारी जमीन को पोषित करता है और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करता है।”
शरीफ ने कहा कि साझा नदियों को नियंत्रित करने वाली संधियों को राजनीतिक सुविधा के अनुसार अलग नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा, “इनका बिना शर्त, अक्षरशः और भावना के साथ सम्मान किया जाना चाहिए।”
पाकिस्तान लगातार कहता रहा है कि इंडस वाटर्स ट्रीटी को एकतरफा निलंबित या कमजोर नहीं किया जा सकता। इस्लामाबाद का दावा है कि जल प्रवाह में किसी भी तरह की बाधा उसकी कृषि, खाद्य सुरक्षा और लाखों लोगों की आजीविका पर असर डाल सकती है।
इंडस वाटर्स ट्रीटी 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से भारत और पाकिस्तान के बीच हुई थी। इसके तहत सिंधु बेसिन की छह नदियों का बंटवारा किया गया था। भारत को सतलुज, ब्यास और रावी नदियां मिलीं, जबकि पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों पर अधिकार मिला।
शरीफ ने अपने संबोधन में कहा कि दक्षिण एशिया जैसे संवेदनशील क्षेत्र में पानी को विवाद या दबाव का माध्यम बनाने से क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर असर पड़ सकता है।
उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान की प्रतिबद्धता भी दोहराई और कहा कि पिछले 25 वर्षों में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में 90,000 से अधिक पाकिस्तानी मारे गए हैं तथा देश को 150 अरब डॉलर से अधिक का आर्थिक नुकसान हुआ है।



















