अमेरिका ने अस्थायी 10% टैरिफ की अवधि समाप्त होने के साथ ही भारत समेत अपने 60 व्यापारिक साझेदारों पर “फोर्स्ड लेबर” यानी जबरन श्रम से जुड़े स्थायी टैरिफ लगाने की घोषणा की है। भारत पर टैरिफ दर 10% रखी गई है, जबकि पहले इसके 12.5% तक जाने का प्रस्ताव था।
अमेरिका ने फरवरी 2026 में अपने सभी व्यापारिक साझेदारों पर 150 दिनों के लिए अस्थायी 10% टैरिफ लगाया था, जिसकी अवधि 24 जुलाई को समाप्त हो गई।
इसके बाद अब अमेरिका ने उन जांचों के आधार पर स्थायी टैरिफ लागू किए हैं, जिनमें यह देखा गया कि उसके व्यापारिक साझेदार जबरन श्रम से बने सामानों के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठा रहे हैं या नहीं।
मार्च में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत दो अलग-अलग जांचें शुरू की थीं। इनमें से एक जांच जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात की रोकथाम से जुड़ी थी। इसी जांच के निष्कर्षों के आधार पर भारत समेत 60 देशों पर नए टैरिफ लगाए गए हैं।
हालांकि भारत की दर प्रस्तावित 12.5% के बजाय 10% ही रखी गई है, जो अस्थायी टैरिफ की दर के बराबर है।
एक अलग जांच अतिरिक्त उत्पादन क्षमता यानी एक्सेस कैपेसिटी से जुड़ी है, जो अभी लंबित है। अगर इस जांच में प्रतिकूल निष्कर्ष आते हैं, तो आगे और टैरिफ लगाए जा सकते हैं।
























