रूस की संसद के निचले सदन स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोदिन ने सोमवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं की यह मुलाकात ब्रिक्स संसदीय मंच के दौरान हुई।
वोलोदिन ब्रिक्स संसदीय मंच में रूसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। दो दिवसीय यह कार्यक्रम मंगलवार तक चलेगा।
सितंबर के अंत में नई स्टेट ड्यूमा के गठन के बाद वोलोदिन की यह पहली विदेश कार्य यात्रा है।
'भारत और रूस के संबंध आपसी सम्मान पर आधारित'
प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के दौरान वोलोदिन ने भारत और रूस के संबंधों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने आपसी सम्मान और दोहरे मानदंडों से मुक्त सहयोग का एक विशेष मॉडल विकसित किया है।
वोलोदिन ने अपने बयान में कहा, “रूस और भारत ने दोनों देशों के नेताओं के नेतृत्व में सहयोग का ऐसा मॉडल विकसित किया है, जो आपसी सम्मान और दोहरे मानदंडों के अभाव पर आधारित है।”
उन्होंने दोनों देशों के बीच विकसित हुई रणनीतिक साझेदारी के महत्व पर जोर दिया।
भारत और रूस अपने द्विपक्षीय संबंधों को 'विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी' के रूप में वर्णित करते हैं।
इस वर्ष भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। इसी के तहत नई दिल्ली में ब्रिक्स संसदीय मंच का आयोजन किया गया है।
इस मंच का उद्देश्य सदस्य देशों की संसदों के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा देना है।
ब्रिक्स की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के समूह के रूप में हुई थी। बाद में इसका विस्तार हुआ और अब इसमें 11 देश शामिल हैं।
भारत और रूस ने अपने द्विपक्षीय व्यापार को वर्ष 2030 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग 70 अरब डॉलर रहा था।
दोनों देश व्यापार, ऊर्जा और रक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक तथा रणनीतिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
रूस भारत के प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ताओं में भी शामिल है।
रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी रिकॉर्ड 51 प्रतिशत तक पहुंच गई थी।























