भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने गुरुवार को ब्रिटेन द्वारा आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इस बैठक का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य से पारगमन संकट के समाधान के तरीकों पर विचार करना था।
इस बैठक में 60 से अधिक देशों ने हिस्सा लिया, जहां मुख्य फोकस इस अहम समुद्री मार्ग को फिर से खोलने और सुरक्षित बनाने पर रहा।
यह आह्वान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बार-बार संकेत दिया है कि जलडमरूमध्य का उपयोग करने वालों पर निर्भर करेगा कि वे इसे खोलें, क्योंकि तेहरान ने इजरायल और अमेरिका के साथ युद्ध के बाद मार्ग को लगभग बंद कर दिया था।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। इसके जरिए उर्वरक जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति होती है, जो खासकर अफ्रीका में कृषि के लिए बेहद जरूरी हैं।
यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा निर्यात का भी प्रमुख रास्ता है, जहां से तेल, परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पाद और तरलीकृत प्राकृतिक गैस दुनिया के कई देशों तक पहुंचती है।
इन आपूर्तियों के माध्यम से घरों को ऊर्जा मिलती है, हवाई यात्रा संचालित होती है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार तथा खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाएं चलती रहती हैं।
ऐसे में इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाली शिपिंग में किसी भी तरह की बाधा का असर तुरंत और व्यापक होता है, जिससे वैश्विक आपूर्ति, कीमतों और आर्थिक स्थिरता पर गंभीर प्रभाव पड़ता है, और दुनिया भर के समुदायों पर मानवीय संकट गहरा सकता है।












