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UNSC में वास्तविक सुधार के लिए वीटो पावर वाले स्थायी वर्ग का विस्तार करना जरूरी: भारत
भारत ने उन प्रस्तावों को खारिज किया, जिनमें बिना वीटो अधिकार के स्थायी सदस्यों की नई श्रेणी बनाने की बात कही गई है।
UNSC में वास्तविक सुधार के लिए वीटो पावर वाले स्थायी वर्ग का विस्तार करना जरूरी: भारत
यूएनएससी बैठक / AP

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार को लेकर भारत ने स्थायी सदस्यता के लिए “दो-स्तरीय” व्यवस्था के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। साथ ही, भारत ने G4 देशों के उस समझौता प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें नए स्थायी सदस्यों के लिए वीटो अधिकार को 15 वर्षों तक टालने की बात कही गई है।

संयुक्त राष्ट्र में सुरक्षा परिषद सुधार पर अंतर-सरकारी वार्ताओं (IGN) के दौरान भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी. हरिश ने कहा कि परिषद में वास्तविक सुधार के लिए वीटो अधिकार के साथ स्थायी सदस्यता का विस्तार आवश्यक है।

उन्होंने कहा, “वीटो के साथ स्थायी श्रेणी का विस्तार सुरक्षा परिषद में वास्तविक सुधार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।” उन्होंने जोर दिया कि सुधार केवल परिषद की संरचना ही नहीं, बल्कि वीटो अधिकार के मुद्दे को भी संबोधित करने चाहिए, ताकि लंबे समय से चले आ रहे असंतुलन को दूर किया जा सके।

भारत ने उन प्रस्तावों को खारिज किया, जिनमें बिना वीटो अधिकार के स्थायी सदस्यों की नई श्रेणी बनाने की बात कही गई है। भारत का कहना है कि इससे बातचीत और जटिल हो जाएगी और असमानता को संस्थागत रूप मिल जाएगा।

हालांकि, भारत ने लचीलापन दिखाते हुए G4 समूह भारत, ब्राज़ील, जर्मनी और जापान के प्रस्ताव का समर्थन किया है। इस प्रस्ताव के तहत नए स्थायी सदस्य 15 वर्षों तक वीटो का इस्तेमाल नहीं करेंगे और उसके बाद इस मुद्दे की समीक्षा की जाएगी।

यह प्रस्ताव ब्राज़ील की ओर से G4 के प्रतिनिधि के रूप में पेश किया गया, जिसका उद्देश्य लंबे समय से जारी गतिरोध को तोड़ना है।

भारत ने यह भी कहा कि UNSC की मौजूदा संरचना, जो करीब 80 साल पहले बनाई गई थी, आज की वैश्विक वास्तविकताओं को नहीं दर्शाती। हरिश ने बताया कि 1965 में गैर-स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने वाला सुधार भी वीटो रखने वाले देशों की शक्ति को और बढ़ा गया।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्थायी श्रेणी में वीटो के साथ विस्तार नहीं किया गया, तो मौजूदा असंतुलन और असमानताएं बनी रहेंगी और परिषद की वैधता व प्रतिनिधित्व पर सवाल उठते रहेंगे।

भारत ने अफ्रीकी देशों के उस रुख का भी समर्थन दोहराया, जिसमें कहा गया है कि जब तक वीटो प्रणाली मौजूद है, तब तक नए स्थायी सदस्यों को भी यह अधिकार मिलना चाहिए।

वीटो सुधार की जटिलताओं का जिक्र करते हुए भारत ने कहा कि इसके उपयोग को सीमित करने के प्रयास, जैसे 2022 में संयुक्त राष्ट्र महासभा का प्रस्ताव, प्रभावी साबित नहीं हुए हैं। इसके बावजूद विभिन्न देशों द्वारा अपने राष्ट्रीय हितों के तहत वीटो का इस्तेमाल जारी है।

स्रोत:Others
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