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हीटवेव अलर्ट: केंद्र ने राज्यों को श्रमिकों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए
27 अप्रैल को देश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से 46 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया।
हीटवेव अलर्ट: केंद्र ने राज्यों को श्रमिकों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए
FILE PHOTO: नई दिल्ली में गर्मी की लहर / Reuters

देशभर में बढ़ती गर्मी और लगातार तेज होती हीटवेव के बीच श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

मंत्रालय ने विशेष रूप से बाहर काम करने वाले और शारीरिक रूप से कठिन कार्यों में लगे श्रमिकों के लिए तत्काल सुरक्षा उपाय लागू करने को कहा है। वहीं, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी राज्यों से अत्यधिक गर्मी से कमजोर और संवेदनशील आबादी की सुरक्षा के लिए पहले से तैयारी करने को कहा है।

27 अप्रैल को देश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से 46 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया। पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र, पूर्वोत्तर बिहार और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों को छोड़कर लगभग पूरे देश में तापमान सामान्य से काफी ऊपर रहा। पूर्वी उत्तर प्रदेश के बांदा में सबसे अधिक 47.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड और तमिलनाडु के कुछ इलाकों में तापमान में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। हरियाणा, दिल्ली, पश्चिम राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना और तटीय आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से 3 से 5 डिग्री अधिक रहा।

श्रम मंत्रालय ने राज्यों को बहु-क्षेत्रीय और समन्वित रणनीति अपनाने की सलाह दी है। इसके तहत नियोक्ताओं से कार्य के समय में बदलाव, पीक गर्मी के घंटों में काम की गति कम करने और श्रमिकों के लिए पर्याप्त पीने के पानी की व्यवस्था करने को कहा गया है। साथ ही कूलिंग एरिया, आपातकालीन आइस पैक, हीट स्ट्रोक से बचाव सामग्री और नियमित स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

मंत्रालय ने कहा कि फैक्ट्री और खदान प्रबंधन को कार्य समय में लचीलापन देना होगा, विशेषकर दोपहर की तेज गर्मी के दौरान काम की रफ्तार धीमी करनी होगी। जहां लगातार संचालन जरूरी हो, वहां अतिरिक्त श्रमिकों की तैनाती के साथ उचित वेंटिलेशन और कूलिंग सुविधाएं सुनिश्चित करनी होंगी।

निर्देशों में निर्माण श्रमिकों, ईंट-भट्ठा मजदूरों, दिहाड़ी श्रमिकों और असंगठित क्षेत्र के कामगारों जैसे सबसे संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया है। इन तक जानकारी पहुंचाने के लिए श्रम चौकों और सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर, जागरूकता अभियान और आपातकालीन प्रतिक्रिया संबंधी निर्देश जारी करने को कहा गया है।

कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) और श्रम कल्याण महानिदेशालय के तहत आने वाले अस्पतालों और डिस्पेंसरी में हीटस्ट्रोक मरीजों के लिए विशेष हेल्प डेस्क स्थापित करने तथा ओआरएस, आइस पैक और जरूरी चिकित्सा सामग्री का पर्याप्त भंडार रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।

श्रम मंत्रालय ने राज्यों और संबद्ध संस्थाओं से हर पखवाड़े उठाए गए कदमों की स्थिति रिपोर्ट भी मांगी है। मंत्रालय का कहना है कि समय पर रोकथाम और लगातार निगरानी ही गर्मी के चरम महीनों में श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है।

दूसरी ओर, NHRC ने 21 राज्यों और दिल्ली के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर हीटवेव की बढ़ती आवृत्ति, अवधि और तीव्रता पर चिंता जताई है। आयोग ने कहा कि इसका सबसे अधिक असर गरीब, हाशिए पर रहने वाले समुदायों, बेघर लोगों और खुले में काम करने वाले श्रमिकों पर पड़ता है। बुजुर्ग, बच्चे और शिशु भी अत्यधिक गर्मी के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों का हवाला देते हुए आयोग ने बताया कि 2019 से 2023 के बीच देशभर में लू और सनस्ट्रोक के कारण 3,712 लोगों की मौत दर्ज की गई। आयोग ने राज्यों से राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की गाइडलाइंस के अनुसार राहत उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने और जनहानि कम करने के लिए अग्रिम कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।

स्रोत:Other
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