प्रधानमंत्री मोदी वेस्ट बैंक में इज़राइली कारवाई का विरोध करने का साहस नहीं रखते: काँग्रेस
जयराम रमेश के अनुसार, इज़राइल ने दक्षिणी लेबनान में एक बड़े बफर ज़ोन बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं और वेस्ट बैंक में अपने कब्ज़े को “स्थायी रूप” देने की दिशा में निर्णायक कार्रवाई की है।
कांग्रेस ने शनिवार को आरोप लगाया कि मध्य पूर्व में जारी युद्ध के बीच इज़राइल “ग्रेटर इज़राइल” की अपनी परिकल्पना को आगे बढ़ा रहा है, जिससे स्वतंत्र फ़िलिस्तीनी राज्य की संभावना लगभग समाप्त हो रही है। पार्टी ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी की भी आलोचना की।
कांग्रेस संचार सचिव जयराम रमेश ने कहा कि अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हवाई हमले तथा ईरान की जवाबी कार्रवाई शुरू हुए 28 दिन हो चुके हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि इस दौरान दुनिया का ध्यान होर्मुज़ जलडमरूमध्य और खाड़ी देशों के ऊर्जा ढांचे पर केंद्रित रहा, जबकि इज़राइल ने गाज़ा में अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखी है।
रमेश के अनुसार, इज़राइल ने दक्षिणी लेबनान में एक बड़े बफर ज़ोन बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं और वेस्ट बैंक में अपने कब्ज़े को “स्थायी रूप” देने की दिशा में निर्णायक कार्रवाई की है। उनका कहना है कि मौजूदा हालात इज़राइल को “ग्रेटर इज़राइल” की नीति को आगे बढ़ाने का अवसर दे रहे हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ अपने संबंधों के वजह से वेस्ट बैंक में इज़राइल की कार्रवाई पर कोई स्पष्ट आपत्ति नहीं जताई है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की हालिया इज़राइल यात्रा से कुछ दिन पहले ही इज़राइली कैबिनेट ने वेस्ट बैंक के लगभग आधे हिस्से में भूमि पंजीकरण को मंजूरी दी थी, जो 1967 के बाद पहली बार हुआ है। रमेश के अनुसार, इससे बड़ी संख्या में फ़िलिस्तीनियों के विस्थापन का खतरा पैदा हो सकता है।
कांग्रेस ने पिछले महीने भी प्रधानमंत्री की इज़राइल यात्रा की आलोचना की थी और आरोप लगाया था कि मोदी सरकार फ़िलिस्तीनी मुद्दे पर “दोहरे मानदंड” अपना रही है।
पार्टी का कहना है कि एक ओर भारत फ़िलिस्तीन के समर्थन की बात करता है, जबकि दूसरी ओर ज़मीनी स्तर पर वह इज़राइल के साथ अपने संबंधों को प्राथमिकता दे रहा है।
कांग्रेस का यह बयान ऐसे समय आया है जब गाज़ा और वेस्ट बैंक में इज़राइल की कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और आलोचना लगातार बढ़ रही है।