पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी बलूचिस्तान प्रांत में अलग-अलग अभियानों में 21 उग्रवादी मारे गए, जबकि छह सुरक्षाकर्मियों और कस्टम विभाग के एक अधिकारी की मौत हो गई। पाकिस्तानी सेना ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
सेना के बयान के अनुसार, पहले अभियान में सुरक्षा बलों ने 11 उग्रवादियों को मार गिराया। आरोप है कि इन उग्रवादियों ने सोमवार को एक प्रमुख राजमार्ग पर अवैध चेकपोस्ट बनाकर रास्ता रोका था और वसूली कर रहे थे।
सेना ने कहा कि मारे गए उग्रवादियों के पास से बड़ी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक बरामद किए गए।
इसी रात एक अन्य अभियान में कम से कम 10 उग्रवादी मारे गए। पाकिस्तानी सेना ने इन्हें “फितना अल-खवारिज” से संबंधित बताया। इस शब्द का इस्तेमाल इस्लामाबाद तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी के लिए करता है।
सेना के अनुसार, ये उग्रवादी एक कस्टम कंपाउंड में घुसने की कोशिश कर रहे थे। मुठभेड़ के दौरान छह सुरक्षाकर्मी, जिनमें दो सैन्य अधिकारी शामिल थे, और कस्टम विभाग का एक सरकारी अधिकारी मारा गया।
सेना ने कहा कि आसपास के इलाकों में “सैनिटाइजेशन ऑपरेशन” जारी हैं, ताकि बचे हुए उग्रवादियों को खत्म किया जा सके और स्थानीय आबादी तथा महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
पाकिस्तान में हाल के वर्षों में उग्रवादी हमलों में वृद्धि देखी गई है। इस्लामाबाद इन हमलों के लिए पड़ोसी भारत और “अफगानिस्तान-आधारित” उग्रवादियों को जिम्मेदार ठहराता रहा है। हालांकि, नई दिल्ली और काबुल दोनों इन आरोपों से इनकार करते हैं।
इस्लामाबाद स्थित थिंक टैंक पाकिस्तान इंस्टिट्यूट फॉर कान्फ्लिक्ट एण्ड सिक्युरिटी स्टडीस के मासिक आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में पाकिस्तान में 199 उग्रवादी हमले दर्ज किए गए, जबकि जुलाई में यह संख्या 144 थी। इस तरह हमलों में 38 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में हुए हमलों में 158 लोगों की मौत हुई और 181 लोग घायल हुए। जुलाई में उग्रवादी हमलों में 268 मौतें और 216 घायल दर्ज किए गए थे।














