भारत ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में हासिल की बड़ी उपलब्धि, स्वदेशी रिएक्टर ने हासिल की ‘क्रिटिकेलिटी ’

ऊर्जा की बढ़ती मांग के बीच भारत ने वर्ष 2047 तक अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को मौजूदा 8 गीगावाट से बढ़ाकर 100 गीगावाट तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।

By
कलपक्कम स्थित इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र में लगभग 200 टन वजनी परमाणु रिएक्टर सुरक्षा पात्र स्थापित किया गया है। / Reuters

भारत ने अपने परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए स्वदेशी रूप से विकसित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर में नियंत्रित परमाणु प्रतिक्रिया प्राप्त कर ली है। यह वह अहम चरण है, जिसके बाद रिएक्टर भविष्य में बिजली उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ सकेगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस उपलब्धि को भारत के नागरिक परमाणु कार्यक्रम में “निर्णायक कदम” बताया। उन्होंने कहा कि यह विकास देश के परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण को आगे बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगा।

प्रधानमंत्री के अनुसार, यह उन्नत रिएक्टर जितना ईंधन उपयोग करता है, उससे अधिक ईंधन उत्पन्न करने में सक्षम है। उन्होंने इसे भारत की वैज्ञानिक क्षमता और इंजीनियरिंग कौशल का प्रमाण बताया। साथ ही, उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि देश के विशाल थोरियम भंडार के उपयोग की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

तमिलनाडु के कल्पक्कम में स्थित यह रिएक्टर फिलहाल बिजली उत्पादन नहीं कर रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इसे पूर्ण क्षमता पर लाने और ग्रिड से जोड़ने के लिए अभी कई चरणों से गुजरना होगा।

ऊर्जा की बढ़ती मांग के बीच भारत ने वर्ष 2047 तक अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को मौजूदा 8 गीगावाट से बढ़ाकर 100 गीगावाट तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। वर्तमान में भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश होने के साथ-साथ ग्रीनहाउस गैसों का तीसरा सबसे बड़ा उत्सर्जक भी है।

यह उपलब्धि ऐसे समय आई है, जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, खासकर मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण। भारत अभी भी बड़े पैमाने पर कोयले पर निर्भर है, लेकिन उसने 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन हासिल करने का संकल्प लिया है।