कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने गाज़ा युद्ध को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए उस पर भारत की पारंपरिक नीतियों और मानवीय मूल्यों से समझौता करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि गाज़ा और लेबनान में जारी संघर्ष पर प्रधानमंत्री की चुप्पी “नैतिक कायरता” को दर्शाती है।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री गाज़ा में इज़राइल द्वारा जारी “नरसंहार” और लेबनान पर भारी बमबारी पर पूरी तरह मौन हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कब्जे वाले वेस्ट बैंक में लाखों फ़िलिस्तीनियों के विस्थापन और बेदखली पर भी सरकार ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
उन्होंने लिखा, “किसी भी सरकार ने इज़राइल की हिंसक नीतियों के प्रति उतनी एकजुटता नहीं दिखाई, जितनी मोदी सरकार ने दिखाई है। यह सरकार पारंपरिक भारतीय सिद्धांतों और विदेश नीति की पुरानी स्थिति के साथ-साथ मानवीय मूल्यों से भी विमुख हो गई है।”
इसी दिन भारत स्थित फ़िलिस्तीन दूतावास ने संयुक्त राष्ट्र महिला (UN Women) की हालिया रिपोर्ट ‘द कॉस्ट ऑफ वॉर इन गाज़ा ऑन वीमेन एंड गर्ल्स’ का हवाला देते हुए फ़िलिस्तीनी महिलाओं और लड़कियों पर युद्ध के गंभीर असर को रेखांकित किया।
दूतावास ने कहा कि गाज़ा में मारे गए लोगों में 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं और बच्चे हैं, जबकि लगभग 10 लाख महिलाएं और लड़कियां जबरन विस्थापित हुई हैं। इनमें से कई को कई बार असुरक्षित परिस्थितियों में अपना ठिकाना बदलना पड़ा है और उन्हें पर्याप्त आश्रय तथा बुनियादी सेवाएं भी उपलब्ध नहीं हैं।
बयान में गाज़ा की स्वास्थ्य व्यवस्था के लगभग ध्वस्त हो जाने पर भी चिंता जताई गई। दूतावास के अनुसार, गाज़ा में करीब 50,000 गर्भवती महिलाएं हैं और हर दिन 180 से अधिक प्रसव हो रहे हैं, जो बेहद असुरक्षित और अस्वच्छ परिस्थितियों में बिना पर्याप्त मातृ देखभाल के हो रहे हैं।
दूतावास ने यह भी कहा कि गाज़ा की 90 प्रतिशत से अधिक आबादी गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रही है, जिसमें महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हैं। साथ ही, स्वच्छ पानी और स्वच्छता सेवाओं तक पहुंच भी गंभीर रूप से प्रभावित हुई है।


















