भारत सरकार ने बुधवार को ईरान में मौजूद अपने नागरिकों के लिए नई एडवाइजरी जारी करते हुए उन्हें “यथाशीघ्र देश छोड़ने” की सख्त सलाह दी है। यह कदम क्षेत्र में जारी तनाव और हालिया घटनाक्रम के मद्देनज़र उठाया गया है।
ईरान में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी संदेश में कहा कि भारतीय नागरिक सुझाए गए सुरक्षित मार्गों का उपयोग कर जल्द से जल्द देश से बाहर निकलें। दूतावास ने यह भी स्पष्ट किया कि बिना पूर्व परामर्श और समन्वय के किसी भी अंतरराष्ट्रीय स्थलीय सीमा तक पहुंचने का प्रयास न करें।
यह एडवाइजरी अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा के कुछ घंटों बाद जारी की गई। इससे पहले मंगलवार शाम दूतावास ने भारतीयों को 48 घंटे तक जहां हैं वहीं रहने की सलाह दी थी।
तनाव उस समय और बढ़ गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर तय समयसीमा तक समझौता नहीं किया, तो “पूरी सभ्यता समाप्त हो सकती है।” यह समयसीमा बुधवार सुबह भारतीय समयानुसार समाप्त होनी थी।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद शुरू हुए संघर्ष के समय करीब 9,000 भारतीय नागरिक, जिनमें बड़ी संख्या में छात्र शामिल हैं, ईरान में मौजूद थे। अब तक लगभग 1,800 भारतीय वापस लौट चुके हैं।
इस बीच, अमेरिका और ईरान ने ट्रंप की तय समयसीमा समाप्त होने से लगभग एक घंटे पहले दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति जताई। यह समझौता उस बातचीत के बाद हुआ, जिसमें ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर से बात की थी।
पाकिस्तान ने 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच वार्ता आयोजित करने की पेशकश की है, जिसका उद्देश्य संघर्ष का स्थायी समाधान निकालना है। वहीं, तेहरान ने भी इस वार्ता में शामिल होने पर सहमति जताई है।












